- kvnaveen834
- Oct 31
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*कमजोरी में सामर्थ्य - एक दैवीय दृष्टिकोण 🌿*
एक बार, दो गहरे दोस्त थे जो एक-दूसरे के साथ सब कुछ साझा करते थे। एक दिन, भारी मन से, एक दोस्त ने अपनी कमजोरी कबूल की - एक शारीरिक चुनौती जो उन्हें दूसरों की तुलना में अपर्याप्त महसूस कराती थी। उनकी आँखें भर आईं जब उन्होंने कहा, "मुझे एक शारीरिक चुनौती है, और मैं चाहती हूँ कि मैं भी बाकी सब जैसा होती।"
दूसरे दोस्त ने उन्हें दया के साथ देखा और कहा: "तुम शारीरिक रूप से कमजोर हो सकती हो, लेकिन तुम्हारी आत्मा मजबूत है। ऐसे बहुत से लोग हैं जो बाहर से मजबूत दिखते हैं, लेकिन अंदर से आध्यात्मिक रूप से कमजोर हैं। याद रखो - शारीरिक रूप से सिद्ध होने से बेहतर है कि आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनो। परमेश्वर हर चीज़ के नियंत्रण में है, और उसका सामर्थ्य हमारी कमजोरी के माध्यम से सबसे अधिक चमकता है।"
ये शब्द 2 कुरिन्थियों 12:9 में पाए जाने वाले एक शाश्वत सत्य को दर्शाते हैं, जहाँ प्रेरित पौलुस ने लिखा है: "परन्तु उसने मुझसे कहा, 'मेरा अनुग्रह तुम्हारे लिए काफी है, क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है।' इसलिए मैं और भी खुशी से अपनी कमजोरियों पर घमंड करूँगा, ताकि मसीह का सामर्थ्य मुझ पर छाया रहे।"
यह पद हमें याद दिलाता है कि हमारी कमजोरियाँ - चाहे शारीरिक हों, भावनात्मक हों या मानसिक हों - असफलता के संकेत नहीं हैं। वे परमेश्वर के सामर्थ्य को प्रकट करने के अवसर हैं। जब हम उस पर भरोसा करते हैं, तो उसका अनुग्रह हमारी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।
असली कमजोरी शरीर में नहीं, बल्कि उस हृदय में है जो विश्वास के बिना जीता है। शारीरिक कमजोरी हमारे हाथों के कामों को सीमित कर सकती है, लेकिन आत्मिक कमजोरी यह सीमित करती है कि हमारी आत्मा क्या बन सकती है।
इसलिए, यदि आप कभी टूटा हुआ या अपर्याप्त महसूस करें, तो याद रखें - परमेश्वर अभी भी नियंत्रण में है। वह आपके दिल को देखता है, वह आपके विश्वास को महत्व देता है, और वह हर कमजोरी को अपने सामर्थ्य की गवाही में बदल देता है।
क्योंकि जब दुनिया कहती है, "तुम कमजोर हो,"
तब परमेश्वर कहते हैं, "तुम वह पात्र हो जिसके माध्यम से मेरा सामर्थ्य चमकता है।"...
परमेश्वर के नाम की स्तुति हो। आमीन।
Writer ----- sis Christina Shaji, Dubai
Transaltion- Bro Job Matthew Abraham, New Delhi
Mission Sagacity Volunteers

