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Encouraging Thoughts

✨मृत्यु पर विजय ✨

मृत्यु मानव जाति के सबसे बड़े भयों में से एक है। बाइबिल हमें बताती है कि "पाप की मजदूरी तो मृत्यु है" (रोमियों 6:23)। पाप के कारण, मानव जाति परमेश्वर से अलग हो गई थी और उसके पास स्वयं को बचाने की कोई आशा नहीं थी।


लेकिन परमेश्वर ने अपने महान प्रेम और दया में, यीशु मसीह को इस दुनिया में भेजा। वे कलवरी के क्रूस पर गए और हमारे पापों को अपने ऊपर ले लिया, और वह दंड भोगा जिसके हकदार हम थे।


वे मरे ताकि हम जी सकें।


वे जी उठे ताकि हमें अनंत जीवन मिल सके।


यदि यीशु केवल मरते और फिर से जीवित न होते, तो हमारा विश्वास व्यर्थ होता। लेकिन परमेश्वर की स्तुति हो, कब्र खाली है! यीशु विजय के साथ जी उठे, यह साबित करते हुए कि पाप का मूल्य चुका दिया गया है, मृत्यु पराजित हो गई है, और हर उस आत्मा के लिए आशा है जो उन पर विश्वास करती है।


मसीह का पुनरुत्थान केवल वर्ष में एक बार याद करने वाली चीज़ नहीं है — यह हमारी आशा की नींव है। लेकिन यह धन्य आशा केवल उन्हीं की है जो वास्तव में बचाए गए हैं। पुराने पापमय जीवन को मरना होगा, और हमारे हृदयों को उनके प्रति समर्पित होना होगा। तभी हम वास्तव में इस वादे में आनंदित हो सकते हैं: भले ही हम मर जाएँ, फिर भी हम जीवित रहेंगे।


📖 याद रखने योग्य वचन 📖

यूहन्ना 11:25


"यीशु ने उससे कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ: जो कोई मुझ पर विश्वास करता है, वह यदि मर भी जाए, तो भी जीएगा।"



✍️ ✍️ ✍️ Sis Shincy Jonathan, Australia 🇦🇺

Transaltion by # Bro Job Matthew Abraham, New Delhi

Mission Sagacity Volunteers

 
 
 

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